सनातन धर्म क्या है? एक सरल और शास्त्रीय परिचय

प्रस्तावना

सनातन धर्म केवल किसी पूजा-पद्धति या संप्रदाय का नाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक शाश्वत पद्धति है। “सनातन” शब्द का अर्थ होता है — जो सदा से है, सदा रहेगा। यही कारण है कि इसे समय, स्थान और परिस्थिति से परे माना गया है।


‘सनातन’ शब्द का शास्त्रीय अर्थ

संस्कृत में सनातन का अर्थ है — नित्य, शाश्वत, अनादि

शास्त्रों में कहा गया है कि:

जो नियम सृष्टि के आरंभ से हैं और सृष्टि के अंत तक रहेंगे, वही सनातन हैं।

अर्थात — सत्य, करुणा, धर्म, अहिंसा, कर्तव्य और आत्मबोध — ये सभी सनातन सिद्धांत हैं।


सनातन धर्म की मूल अवधारणा

सनातन धर्म किसी एक ईश्वर-रूप या एक पुस्तक तक सीमित नहीं है। यह कहता है:

  • ईश्वर एक है, उसके रूप अनेक हैं
  • प्रत्येक जीव में आत्मा है
  • कर्म का फल अवश्य मिलता है
  • जन्म–मरण के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) संभव है

यही कारण है कि सनातन धर्म सहिष्णु, समावेशी और उदार है।


शास्त्रों में सनातन धर्म का उल्लेख

वेद

वेदों में ऋत (सार्वभौमिक नियम) की अवधारणा दी गई है — यही ऋत आगे चलकर धर्म कहलाया।

उपनिषद

उपनिषद कहते हैं:

आत्मा और ब्रह्म एक ही हैं

यानी हर व्यक्ति के भीतर वही चेतना है जो पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त है।

भगवद्गीता

गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि:

  • मनुष्य का कर्तव्य कर्म करना है
  • फल की आसक्ति छोड़नी चाहिए
  • धर्म के मार्ग पर चलना ही जीवन का उद्देश्य है

क्या सनातन धर्म = हिंदू धर्म?

शास्त्रीय दृष्टि से

  • “सनातन धर्म” मूल शब्द है
  • “हिंदू” शब्द भौगोलिक और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा है अर्थात, हिंदू वह है जो सनातन धर्म के सिद्धांतों को मानता है।

सनातन धर्म जीवन में क्या सिखाता है?

  • परिवार, समाज और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व
  • केवल अधिकार नहीं, कर्तव्य पर ज़ोर
  • भोग नहीं, संतुलन
  • संघर्ष में भी धर्म का पालन

इसीलिए सनातन धर्म को जीवन विज्ञान (Science of Living) भी कहा जाता है।


बिहार और सनातन धर्म

मिथिला की वैदिक परंपरा, गया की पितृ परंपरा, वैशाली की तपोभूमि — बिहार की भूमि सदियों से सनातन संस्कृति की आधारशिला रही है।


निष्कर्ष

सनातन धर्म कोई बंद ढांचा नहीं, बल्कि खुले आकाश जैसा दर्शन है — जहाँ प्रश्न पूछने की स्वतंत्रता है, और उत्तर खोजने का मार्ग भी।


शास्त्रीय स्रोत (Sources)

नीचे दिए गए सभी स्रोत प्रामाणिक और सार्वजनिक डोमेन/मान्य प्रकाशन हैं:

  1. ऋग्वेद – धर्म (ऋत) की अवधारणा
  2. उपनिषद
    • ईशोपनिषद
    • कठोपनिषद
  3. श्रीमद्भगवद्गीता
    • अध्याय 2 (सांख्य योग)
    • अध्याय 3 (कर्म योग)
  4. मनुस्मृति – धर्म की परिभाषा
  5. गीता प्रेस, गोरखपुर – हिंदी टीका एवं व्याख्या
  6. Wikisource (Hindi/Sanskrit) – मूल श्लोक संदर्भ
  7. Sanskritdocuments.org – श्लोक संग्रह

Sanatana Bihar Editorial Note (Optional जोड़ें)

यह लेख शास्त्रों के आधार पर, सरल भाषा में जनसामान्य के लिए प्रस्तुत किया गया है।

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